पवन ऊर्जा का दोहन

पवन ऊर्जा (Wind Energy)- सूर्य द्वारा वायु मण्डल के असमान गर्म होने के कारण वायु प्रवाहित होती है। वायु की पर्याप्त गति उपलब्ध होने पर इसका प्रयोग ऊर्जा स्रोत के रूप में किया जा सकता है।

इस कार्य के लिए पवन चक्की का प्रयोग किया जाता है। पवन चक्की में ऊर्ध्व या क्षैतिज ब्लेड वायु प्रवाह द्वारा घुमाये जाते हैं। इस गति को यन्त्र विन्यास द्वारा जमीन के तल पर करने हेतु पारेषित कर दिया जाता है।

वायु प्रवाह लगातार बदलते रहने के कारण इस विधि से विद्युत उत्पादन में कठिनाई है। पवन चक्कियों का प्रयोग सामान्यतया पानी निकालने (छोटी सिचाँई व पेय जल के रूप में) के लिए किया जाता है। विदेशों में इसका प्रयोग विद्युत उत्पादन के लिए किया जा रहा है।

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इस स्रोत की महत्वपूर्ण उपयोगिता इस बात में है कि लम्बे समय तक विण्डमिल में मरम्मत एवं रख रखाव की आवश्यकता नही होती है। इसकी क्षमता 16% से 20% तक होती है। सामान्यत पवन चक्की के पंख का व्यास 3m तथा ऊँचाई 4m होती है। इसे 12 km/hour मानकर वायु प्रवाह पर 0.11kw शक्ति प्राप्त की जा सकती है।

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